मकान या बंगला?

मकान या बंगला?

महानगरों में किराये की मार: आम आदमी की कमाई का 40% हिस्सा ले रहे मकान मालिक, 1.26 लाख करोड़ सिक्योरिटी डिपॉजिट में फंसे

​देश के बड़े शहरों में रहने वाले आम आदमी और नौकरीपेशा वर्ग पर महंगाई और किराये की दोहरी मार पड़ रही है। फाइनेंसियल प्लानर्स के अनुसार, मासिक आय का 15-20% हिस्सा ही किराये पर खर्च करना सुरक्षित माना जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिलकुल उलट है। देश के टॉप-6 शहरों में किरायेदार अपनी गाढ़ी कमाई का 40% तक हिस्सा सिर्फ मकान के किराये में उड़ा रहे हैं।

​1.26 लाख करोड़ रुपये मकान मालिकों के पास कैद

प्रॉपटेक कंपनी नोब्रोकर की स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में किरायेदारों का ₹1.26 लाख करोड़ सिर्फ सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर फंसा हुआ है। इसमें सबसे खराब हालत मुंबई की है, जहां ₹41,156 करोड़ और बेंगलुरु में ₹31,628 करोड़ डिपॉजिट के तौर पर मकान मालिकों के पास जमा हैं। मुंबई में हर चौथा किरायेदार अपनी आधी से ज्यादा कमाई (50% से अधिक) सिर्फ रेंट में चुका रहा है।

​डिपॉजिट वापसी में विवाद और मजबूरी

सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस लेना भी किरायेदारों के लिए एक बड़ी जंग बन चुका है। दिल्ली-एनसीआर में 12% किरायेदारों को लीज खत्म होने पर डिपॉजिट के लिए भारी विवाद का सामना करना पड़ा, जबकि 30% मामलों में मनमाने तरीके से रकम काट ली गई। बेंगलुरु में तो 75% किरायेदारों को ऊंचे डिपॉजिट की मांग के चलते अपना पसंदीदा घर तक छोड़ना पड़ गया।

​युवा बदल रहे हैं बार-बार घर, ईएमआई भी हुई महंगी

किराये के इस भारी दबाव के कारण 18-24 साल के 30% युवा हर 6 से 12 महीने में घर बदलने को मजबूर हैं। वहीं, जो लोग किराये के झंझट से बचने के लिए अपना घर खरीदना चाहते हैं, उनके लिए भी रास्ते आसान नहीं हैं। होम लोन की ईएमआई अब किराये की तुलना में 2 से 2.5 गुना तक महंगी हो गई है, जिससे अपना घर खरीदने का सपना और भी दूर होता जा रहा है।

​मकान मालिकों की चांदी

एक तरफ किरायेदार परेशान हैं, तो दूसरी तरफ निवेशकों और मकान मालिकों के लिए 1-BHK और स्टूडियो अपार्टमेंट जैसे छोटे घर मुनाफे का सौदा साबित हो रहे हैं। बड़े घरों की तुलना में ये छोटे घर बेहतर रेंटल यील्ड (कमाई) दे रहे हैं।